रिपोर्ट अभिषेक गोडवाल
आज दिनांक 13.02.2025 हरिद्वार विश्वविद्यालय, में हाइड्रोपोनिक्स और जैविक खेती पर आयोजित कार्यक्रम कार्यक्रमों ने छात्रों और किसानों दोनों के लिए कई लाभ प्रदान किए हैं, हरिद्वार विश्वविद्यालय में हाइड्रोपोनिक्स और जैविक खेती पर कई महत्वपूर्ण पहले शुरु की गई हैं। विश्वविद्यालय ने हाइड्रोपोनिक खेती की तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिससे छात्रों और किसानों को मिट्टी रहित कृषि के लाभ और विधियों के बारे में जानकारी मिल रही है। इसके अतिरिक्त, जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालय ने विभिन्न कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित किए हैं, जिनमें विशेषज्ञों ने जैविक कृषि के महत्व, पर्यावरणीय लाभ और टिकाऊ कृषि प्रथाओं पर चर्चा की।

इन पहलों का उद्देश्य हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में कृषि की आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल विधियों को बढ़ावा देना है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण में सहायता मिल सके। आधुनिक कृषि तकनीकों का ज्ञानः छात्रों को हाइड्रोपोनिक्स और जैविक खेती की नवीनतम विधियों से परिचित कराया गया,

जिससे वे कृषि क्षेत्र में नवीनतम रुझानों से अवगत हुए। प्रायोगिक अनुभवः प्रयोगशालाओं और कार्यशालाओं के माध्यम से छात्रों को वास्तविक जीवन में इन तकनीकों का उपयोग करने का अवसर मिला, जिससे उनकी व्यावहारिक समझ में वृद्धि हुई। उद्यमिता कौशलः इन कार्यक्रमों ने छात्रों को कृषि उद्यमिता के लिए प्रेरित किया, जिससे वे भविष्य में कृषि व्यवसाय शुरु करने के लिए तैयार हो सके। उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारीः किसानों को हाइड्रोपोनिक्स और जैविक खेती की लाभकारी तकनीकों के बारे में बताया गया, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सकती है
। पर्यावरणीय लाभः जैविक खेती के माध्यम से रसायन-मुक्त उत्पादन से पर्यावरण की रक्षा होती है. जिससे किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलता है। आर्थिक लाभः उन्नत तकनीकों के उपयोग से उत्पादन लागत में कमी और लाभ में वृद्धि संभव है, जिससे किसानों की आय में सुधार होता है। इन पहलों को उद्देश्य हरिद्वार और रुड़की क्षेत्र में कृषि की आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल विधियों को बढ़ावा देना है,
जिससे छात्रों और किसानों दोनों को लाभ हो सके इस शुभ अवसर पर उपाध्यक्ष नमन बंसल, प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर धर्मवीर सिंह, विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार सुमित चौहान, प्रोफेसर, डॉ विपिन सैनी, विभागाध्यक्ष प्रजवल चौधरी और अन्य संकाय के प्रोफेसर मौजूद थे।





